Introduction

balajiThe glory of Tirupati Balajee is world wide. Every year lakhs of peoplevisit at Tirupati Dev, situated in south of India. One of the devotee from Zirapur, District Rajgarh of M.P. is Shri Om Prakash Mundra & his wife Shakuntala. When this couple reached to have darshan of Tirupati Balajee, a thought came in their mind, why not build the similar grand temple in Zirapur. It was a dream of Late Shri Kishanjee Mundra, resident of Baikunth and father of Shri O.P. Mundra to have a such a grand temple at Zirapur also. Mundra couple then & their determined to construct the grand temple at Zirapur and returned to home town. Later they went with their other family members to Jhalariya Peeth situated at Didwana, (Rajasthan) and met Shree 1008 Shree Swami Shri Ghanshyamacharyajee Maharaj to detail about their dream. Swamijee immediately gave his consent for this great work. The starting was with the formation of Shree Shridhar Gyan Prasar Parmarthik Trust under the guidance of Swamijee Maharaj. Thereafter on 3rd September1998 at Zirapur, a town of Shri S.K. MLmdra with a small population of 25000 people, foundation of Balaji Temple was laid by Swami Shree Ghanshyamacharyajee Maharaj. The construction of temple took about 2 years. From 29th April to 4th May 2000 Pran Pratishtha Samaroh was conducted and Vyankatesh Lord Balajee temple was opened for public, and since than every day 2000-2500 devotee come here to have darshan and-get their will fulfilled.

 

जय श्री मन्नारायण

परिचय तिरूपति बालाजी भगवान की महिमा तो सर्वव्यापी है । प्रतिवर्ष लाखों करोडो भक्त भारत के दक्षिण में स्थित देव स्थान पहुंचते हैं । ऐसे ही एक भक्त म.प्र. के राजगढ जिले के  जीरापुर निवासी श्री ओमप्रकाश मूंदड़ा व  उनकी पत्सी शकुंतला भी जब तिरूपति बालाजी भगवान के दर्शन करने पहुंचे तो उनकें मन में विचार आया कि क्यों न ऐसा ही एक भव्य मंदिर जीरापुर में बनाकर वहां भी भगवान व्यंकटेश बालाजी की पूजा अर्चना की जाए श्री ओ.पी. मूंदड़ा के पिता ब्रैकुंठवासी (स्व) श्री किशनजी  मूंदड़। की भी अभिलाषा थी कि जीरापुर नगर में ऐसा भव्य देव स्थान हो । मूंदडा दम्पन्ति ने वहीँ मंदिर निर्माण का संकल्प लिया और घर आकर परिजनों कं साथ डिडवाना (राजस्थान) स्थित झालरीया पीठ कं पीठाधिपति श्री 1008 श्री रवानी श्री घनश्यामाचार्य जी महाराज को अपनी अभिलाषा से अवगत कराने पहुंचे । रवानी जी महाराज ने तुरत ही इस उत्नम कार्य कं लिए अपनी सहमति दी।

रवानी जी महाराज कं निर्देशन में सर्वप्रथम श्री श्री धर ज्ञान प्रसाद पत्मार्थिक ट्रस्ट का गठन किया गया त्तत्पश्यात्त 25000 लोगों को आबादी वाले जीरापुर नगर कं एसकंजी. मूंदडा नगा जीरापुर में दिनांक 3.9.1998 को रवानी श्री घनश्यामत्वार्य जी महाराज कं कर कमलों से जीरापुर वासा गोविंदा बालाजी मंदिर का शिलान्यास सम्पन्न हुआ । मंदिर निर्माण लगभरा दो वर्षो का समय लगा और फिर 29 अप्रेल से 4 मई 2000 तक चले भव्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह कं उपरांत जीरापुरवत्सा गोविंदा व्यंकटेश बालाजी भाम्बान का मंदिर सनी दर्शनार्थियों कं लिए खोल दिया गया और तभी से यहां प्रतिदिन 2 से 25000 हजार दर्शनाथी अपनी मनोकामनाओं को पूर्ति हेतु दर्शन को आते है और जीरापुरवत्सा गोविंदा उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं।